मैं सर्वधार हो जाउँ
कभी फूलों सी महकती जाऊं तो चिड़िया सी चहकती जाऊ ।
कभी सुबह बनकर चमक जाऊं तो कभी शाम बनकर ढल जाऊं।
कभी हवा बनकर तुझसे टकराउँ तो कभी फिज़ाओं में रन्गीन हो जाउँ ।
कभी पंख लगाकर उड़ जाऊं तो कभी अपने आशियाने में बेठ जाउँ ।
कभी सपना बनकर खो जाउँ तो कभी सपना लेकर वापस आ जाउँ ।
कभी चांद बनकर रोशन हो जाउँ तो कभी सूरज बनकर तेज हो जाउँ ।
कभी किसी का इश्क तो कभी किसी की महोब्बत हो जाउँ ।
कभी किसी की मुस्कान बन जाउँ तो कभी किसी का सहारा ।
कभी आँधी तो कभी बरसात बन जाउँ ।
कभी सावन तो कभी पतझड़ बन जाउँ ।
कभी धुप तो कभी छांव बन जाउँ ।
कभी दर्पण बनकर रुप दिखाऊँ तो कभी परछाई बनकर छुप जाउँ ।
कभी नदी तो कभी समुन्दर हो जाउँ ।
कभी पेड़ तो कभी पक्षी हो जाउँ ।
कभी बर्फ तो कभी पानी हो जाउँ ।
कभी दिन तो कभी रात हो जाउँ ।
कभी पत्थर तो कभी मिट्टी हो जाउँ ।
कभी क्या तो कभी क्या मैं , सर्वधार हो जाऊँ ।🌼🎇💫
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