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Showing posts from July, 2022

पहले खुद को बदलो फिर दुनिया बदलना 🍁

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हम सभी जिन्दगी में जब भी कुछ नया करने की कोशिश करते है तब सहयोग की बजाय असहयोग प्राप्त होता है । और ये कोई नयी बात नहीं है आजतक जितने भी लोग सफल हुए है सभी ऐसे दौर से गुजरे है ।  जो संघर्ष से गुजरे है सबने यही कहा है की संघर्ष में आपके साथ कोई नही होता और सफलता में तो हर कोई आता है ।  और कुछ हद तक सही भी है क्योकिं लोग अपने ही जीवन के संघर्षों से इतने परेशान होते है कि वो एक संघर्षरत व्यक्ति के साथ नहीं रहना चाहते बल्कि एक सफल व्यक्ति को खोजते है ।  पर कई बार हम कुछ करने जाते है तो लोग कहते है पहले खुद को बदलो फिर दुनिया बदलने की बाते करना ।  वो ऐसा बोलते है क्योकिं उन्होनें आपके संघर्ष को नहीं देखा । तो क्या हम शुरुआत भी ना करे? देखिये इस संसार में कोई भी पुर्ण रुप से वैसा कभी नहीं हो सकता जो सबको पसंद आ जाये ।  क्योकिं सबका द्रष्टिकोण अलग है । और अनुभव भी ।  हो सकता है ऐसा बोलने वाले लोगों में कुछ ऐसे गुण हो जो हमारे अन्दर नहीं हो । पर उनमें भी तो कुछ ऐसे अवगुण हो सकते है जो हममें नहीं हो । इसका मतलब तो यही हुआ की संसार में कोई भी परफ़ेक्ट नहीं है ।  ...

भविष्य 🎆

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आज के दौर में जहाँ पढ़े लिखे युवा भी बेरोजगार है कोराना महामारी के बाद ये समस्या और बढ़ गई है । इस मुश्किल दौर में हम सबको अपने भविष्य की चिंता होती है लेकिन क्या चिंता से समाधान हो सकता है ?  नहीं।  इसलिये व्यर्थ भविष्य की चिंताए छोड़कर वर्तमान को सुन्दर बनाये। यहीं हमारे आने वाले कल को निर्मित करता है ।  हम सभी भुत से निर्मित है वर्तमान में जी रहे हैं । और वर्तमान से निर्मित भविष्य की ओर बढ़ रहे है ।  हमारा पुरा जीवन हमारे कर्मों से निर्धारित होता है ।  कर्म अच्छे होंगे तो हम अच्छे जीवन की ओर जायेंगे । भुत से निर्मित वर्तमान और वर्तमान से निर्मित भविष्य की ओर । - ममता सीरवी

पुष्प

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शौर

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बहुत शौर है बाहर , तुमनें खुद को ढक लिया है इस शौरगुल से ।🏞🍀 मेरी छांव में बेठो और सुनो मेरी आवाज को जो तुम्हारी अपनी आवाज है क्योकिं तुम्हें तो मैनें ही बनाया है । मैं , प्रकृति हुँ । मैं कुछ कहना चाहती हुँ । ~ प्रकृति 🏞🌱🍀🌴🌲🌸🌻💐💮🌷🌼🕊 #प्रकृति #पेड़ #पौधें #पक्षी #वातावरण

छांव में तेरी

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छांव में तेरी रखना महफुज मुझे हर पल  साथ छूटे तो मिट जाउँ , साथ रहूँ तो बढ़ती जाउँ  हे गिरधर कृष्ण कन्हैया , छांव में तेरी रखना महफुज मुझे हर पल । ✍ॐ -Mamta Seervi

नियति

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बहती नदी के बीच पत्थर का अवरोध डालने वाले मूर्ख हैं। नदी को क्या कोई पत्थर रोक पाया है ?  प्रकृति से विरोध करने वालों को बाढ़ का ही सामना करना पड़ता है ।  जब बाढ़ आती है तो विरोधी अपना अस्तित्व खो देते हैं ।  इसलिये हो सके तो नियति के साथ चले । -Mamta Seervi

नदी

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तुम कुछ लेकर भी आओगे रास्ते में मेरे तो भी मुझे नहीं रोक पाओगे । तुम पत्थर लेकर आओगे अपनी ताकत दिखाने फिर भी मुझे नहीं रोक पाओगे । तुम कितना ही गन्दा करने का प्रयास करोगे तब भी मैं तुम्हें स्वच्छ करती रहूँगी ।  कयोंकि मैं नदी हुँ ।  -Mamta Seervi

राह

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राह की मुश्किल बस इतनी हैं कि रास्ते में काँटे बहुत है और हमारे पांव नाजुक बहुत है।  कदम लडखड़ाये तो क्या हुआ हम फिर भी चल रहे हैं हम काँटो से गुजरकर फूलों तक जायेंगे ।  और राह को सुन्दर बनायेंगे ।  -Mamta Seervi

मेरा आसमां 🧚‍♀️

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जब धरती साथ छोड़ देती है तो आसमां मुझे अपना बना लेता है।  -Mamta Seervi  

उन्मुक्त 🦋

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उन्मुक्ति ही असली जिन्दगी है। 🦋  जिन्दगी ने मुझे मुक्त होना सिखाया है बन्धन और जंजीरो को तोड़ना सिखाया है।   मैं जब जंजीरो को तोड़ने जाती हुँ तो चोट मुझे भी लगती है।  पर जिन्दगी नें मुझे मुक्त होना ही सिखाया है।  नहीं चलना अब हमें पुराने ढर्रे पर कुछ नये भी बदलने है कुछ पुराने भी बदलने है।  कयोंकि हम सभी को खुश रहने का हक है। -Mamta Seervi

सावन🍃🍃

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सावन के आने से पहले सब वीरान हो जाता है पतझड़ छा जाता है । फूल सूख जाते है पत्ते गिर जाते है । टहनियाँ भी सूखी नज़र आती है ।  पर यही से एक नयी शुरुआत होती है  पतझड़ नये का स्वागत है । जिस तरह बिना साफ किये हम घर को नहीं सजा सकते उसी प्रकार बिना पतझड़ के सावन नहीं ला सकते ।  सावन जब भी आता है साथ हरियाली लाता है ।  नयी उमंग , जोश और नयेपन से भर देता है । हम सभी के जीवन में भी ये सावन नये रंग लेकर आयेगा।  -Mamta Seervi

फूल🌻

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फूलों की मासूमियत तो देखो । कहीं भी खिलने को तैयार है कीचड़ में भी , पत्थर में भी । ये सिखाते है कि आसपास कितनी भी गन्दगी क्यों ना हो उसमें रहते हुए भी मैं उनसे अछूत हुँ।  हर हाल में रहने को तैयार है तभी तो इन्हें पुष्प जेसे सुन्दर नाम से पुकारा जाता है।  -Mamta Seervi

चांद 🌙

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जिन्हें खुबसूरती की पहचान नहीं होती वे चांद में भी दाग ढूँढ लेते है । जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि ।  चांद तो चांद ही रहेगा । सफेद चमक के साथ चांदनी से  शीतलता बरसाता चांद तो चांद ही रहेगा। चांद जेसा ना कोई है और ना कोई होगा । ये अद्वितीय है।   -Mamta Seervi