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Showing posts from June, 2022

Be motiveted

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खुद को मोटीवेट करने के बहुत तरीके है कई बार जब हम दूसरों को मोटीवेट करते है तब हम खुद भी मोटीवेट हो जाते है । इसलिये मैं हमेशा खुद को मोटीवेट रखने के लिये दूसरों की मदद करती हुँ । और उस मदद से जब वो खुश होते है तो मुझे बहुत खुशी मिलती है । और इससे मैं खुद मोटीवेट भी होती हुँ । मोटीवेशन 🌻 मोटीवेशन शब्द तो बहुत छोटा है पर अर्थ इसका बहुत बड़ा है । आइये जानते है आखिर क्या है ये मोटीवेशन और हमारे जीवन में इसकी कितनी आवश्यकता है ! मोटीवेशन यानी एक प्रेरणा ~ आज के समय में हर कोई थका हारा परेशान नज़र आता है । जब भी किसी व्यक्ति के अन्दर इस मोटीवेशन की कमी हो जाती है तभी ऐसा होता है । मोटीवेशन हर इन्सान के लिये एक डोज है । एक दवा का काम करती है ये प्रेरणा । प्रेरणा की शक्ती में ना सिर्फ दवा होती है बल्कि लिखने और बोलने वाले की दुआ भी होती है । आज के इस दौर में जहाँ लोगों के पास एक दूसरें से बात करने का भी समय नहीं है । इस दौर में अकेलापन बढ़ता ही रहा है। हर कोई अकेलेपन का शिकार है । और अकेलापन गंभीर बिमारियों को निमन्त्रण भी दे सकता है । सजग हो जाइये । कहीं हम सब भी इस अकेलेपन का शिकार तो नहीं हो...

आँसू क्यों आते है -

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जब अपने मन की बात को शब्दों में कहना मुश्किल हो जाये तब हमें आँसू आते है । हम जिसे अपना मानते है पर हमें पता चले कि वो हमारा भ्रम था तब भी आँसू आते है । प्रेम दुख का कारण तो नहीं है किन्तु प्रेम आँसुओं का कारण अवश्य बनता है । क्योकिं अगर प्रेम ही दुख का कारण बन जायें तो वो फिर प्रेम नहीं रहता वो तो मौह हो जाता है । प्रेम तो राजी है हर हाल में । अपने ही स्वभाव में । प्रेम कोई मनुष्य करता नहीं है बल्कि प्रेम खुद ही एक अद्वितीय शक्ती है जो हर एक मनुष्य के पास है । प्रेम परमात्मा का दिया उपहार होता है । जिस इंसान में समस्त के प्रति प्रेम भाव होता है उसे सबसे ज्यादा आँसू आते है क्योकिं वो सबकुछ महसूस कर सकता है । आँसू भीतर के सारे दुखों को बाहर निकालने के लिये ही आते है । इसलिये कभी कभी रोना भी बहुत जरुरी होता है । आँसू सकारात्मक है । क्योकिं व्यक्ति जब आँसू बहा लेता है तो उसके बाद गहरी शान्ती का अनुभव करता है ।

क्या करें क्या ना करें 🤔

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क्या करें क्या ना करें 🤔  ? ये क्या करें क्या ना करें का प्रश्न तो लगभग हम सभी के दिमाग में आता है।  एक बार नहीं बहुत बार आता है । इसे ही कन्फ्यूज होना कहते हैं । जिन्दगी के आसान फेंसले तो हम कन्फ्यूजन में भी ले लेते हैं उसमें कोई बड़ी हानि का डर नहीं होता । लेकिन समस्या तो तब होती है जब कोई बड़े फेंसले लेने हो और उस वक्त कुछ समझ ना आये ।  आप सब के साथ भी कभी ना कभी ऐसा होता ही होगा ।  इस सम्बंध में हमें सबसे पहले ये जानने की जरुरत है कि हमारे लिये जीवन में सबसे महत्वपूर्ण क्या है। उसके पश्चात अपनी पहली प्राथमिकता को समझना चाहिये ।  और आखिर में ऐसा फेंसला लेना चाहिये जो खुद के साथ साथ दूसरों के लिये भी परेशानी का कारण ना बने ।  सबसे पहले हमें जीवन और अपनी स्वतंत्रता को मह्त्व देना चाहिये । और अपनी रुचि के अनुसार आगे बढ़ते रहना चाहिये । क्योकिं रुचि के बिना कोई भी कार्य करने पर हम उसमें उतने सफल नहीं हो पाते क्योकिं हमें अपनी ही अन्तरप्रेरणा की अनदेखी नहीं करनी चाहिये । ऐसा करने पर ही हमें परिणाम मनचाहे नहीं मिलते ।

तारिफ करने में क्या हर्ज है...

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मैनें देखा है की आजकल के लोग तारिफ बहुत कम करते है या ना के बराबर ।  अगर हमें दूसरें में कोई अच्छाई नज़र आ रही है तो हमें उसकी तारिफ करनी चाहिये ।  ये नहीं सोचना चाहिये हम क्यों किसी की तारिफ करे ।  जब हम दूसरें के द्वारा किये गये अच्छे कर्मो की सराहना करेंगे तभी तो वो उसे और कर पाएंगे ।  हमें खुद को कितना अच्छा लगता है जब हम तारिफ सुनते है तो वो दूसरों को भी महसूस करवायें । तारिफ करने से मन का विस्तार होता है ।  तारिफ से सकारत्मक ऊर्जा बढ़ती है । ~ममता सीरवी  🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼 🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼

अकेले है तो क्या गम है...

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जिन्दगी हमारी खुशी हमारी तो फिर गम भी तो हमारा ही हुआ ।  अकेलापन भी हमारा अपना ही है । अकेलेपन को कोसो मत दोस्ती कर लो अकेलेपन से ।  अकेले में खुद से बाते करो और नकारात्मक से सकारात्मक दृष्टिकोण में जाने की कोशिश करो ।  अकेलेपन को अपना दोस्त बना लो ये बहुत वफादार है ।  ये बहुत कुछ सीखा देता है ।  जब हम अकेले होते है तब हम सिर्फ खुद के साथ होते है खुद के साथ होने के बहुत फायदे है हम खुद को जानने लगते है ।  जब लोग दूसरों के बारे में बात करते है तब हम खुद को तराशते है ।  खुद को तराशते तराशते एक दिन हमें हमारे अकेलेपन से प्यार हो जाता है खुद से प्यार हो जाता है ।  ये पहला चरण होता है परमात्मा की ओर बढने का । 

पाना और खोना

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जिन्दगी बहुत बड़ी तो नहीं है पर कभी-कभी बहुत बड़ी लगती है ।  तब जब हम कुछ चाहते है हमारी वक्त से कुछ अपेक्षाएँ होती है । और वो पूरी नहीं होती है तब वक्त बहुत लम्बा लगता है कठिन लगता है ।  जिन्दगी से हमें जो भी मिला है सुख या दुख वो हमेशा नहीं रह सकता है पाना और खोना भी होता है ।  कहीं हम किसी से मिलते है तो कहीं बिछडते है ।  ये प्रक्रियाएँ चलती रहती है ।  🌸🌸🌸