पहले खुद को बदलो फिर दुनिया बदलना 🍁
हम सभी जिन्दगी में जब भी कुछ नया करने की कोशिश करते है तब सहयोग की बजाय असहयोग प्राप्त होता है ।
और ये कोई नयी बात नहीं है आजतक जितने भी लोग सफल हुए है सभी ऐसे दौर से गुजरे है ।
जो संघर्ष से गुजरे है सबने यही कहा है की संघर्ष में आपके साथ कोई नही होता और सफलता में तो हर कोई आता है ।
और कुछ हद तक सही भी है क्योकिं लोग अपने ही जीवन के संघर्षों से इतने परेशान होते है कि वो एक संघर्षरत व्यक्ति के साथ नहीं रहना चाहते बल्कि एक सफल व्यक्ति को खोजते है ।
पर कई बार हम कुछ करने जाते है तो लोग कहते है पहले खुद को बदलो फिर दुनिया बदलने की बाते करना ।
वो ऐसा बोलते है क्योकिं उन्होनें आपके संघर्ष को नहीं देखा ।
तो क्या हम शुरुआत भी ना करे?
देखिये इस संसार में कोई भी पुर्ण रुप से वैसा कभी नहीं हो सकता जो सबको पसंद आ जाये ।
क्योकिं सबका द्रष्टिकोण अलग है । और अनुभव भी ।
हो सकता है ऐसा बोलने वाले लोगों में कुछ ऐसे गुण हो जो हमारे अन्दर नहीं हो ।
पर उनमें भी तो कुछ ऐसे अवगुण हो सकते है जो हममें नहीं हो ।
इसका मतलब तो यही हुआ की संसार में कोई भी परफ़ेक्ट नहीं है ।
लेकिन क्या हम इन्तजार करते रहेंगे कि जब तक दुनिया हमें परफ़ेक्ट नहीं कहेगी तब तक हम कोई काम नहीं करेंगे ?
या जीवन को सुन्दर बनाने की दिशा में आगे बढ़ते रहेंगे ।
चाहे कोई सहयोग करे या ना करे अपने अन्तरमन प्रेरणा लेकर हम सभी को वो करना चाहिये ।
जो हमारी दृष्टी में हमारे लिये उचित है साथ में औरो को भी उससे मदद मिले ऐसा काम चुने ।
आज हम क्या है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता पैदा होते ही कोई अव्वल नहीं बन जाता ।
ठोकर खाकर ही सब चलना सीखते है ।
अगर जीवन में कुछ ऐसा करना चाहते है जिससे मन को सन्तोष प्राप्त होता है तो उसे ही अपना लक्ष्य बना ले ।
शुरुआत आज और अभी करें । इसे कल पर ना टाले ।
और जब हम शुरुआत करते है तो धीरे धीरे परफेक्शन की ओर जाने लगते है ।
~ ममता
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