जीवन एक महाभारत

卐 जीवन एक महाभारत 卐

भारत के इतिहास में जो महाभारत हुई थी । वो उस देश काल और परिस्थियों से बनी थी । 
उसमें युध्द ,हिंसा और ना जाने क्या क्या नहीं हुआ ।

परंतु उस महाभारत के पीछे छुपे सार को शायद हम नहीं समझ पाये ।

सार समझने का प्रयास करें तो हम पायेंगे की प्रत्येक मनुष्य का सम्पुर्ण जीवन ही महाभारत है । 

व्यक्ति के अन्दर छिपे गुण ही उसके जीवन की नियति तय करते है और वही उसके जीवन की महाभारत बन जाती है । 

आइये इसे विस्तार से जानते हैं।

महाभारत का युद्ध पांडवो और कौरवों के बीच हुआ था । 

पांडवो के बारे में~ पांडव और कौरव आपस में भाई भाई ही थे । परंतु दौनों में गुणों का बहुत अन्तर था । 

पांडव सत्य की राह पर चलने वाले शुद्ध आत्मा से युक्त थे । 

उनके गुण ईश्वर को प्रसन्न करने वाले थे । वे परोपकारी और ध्येयवादी थे हमेशा दूसरों की मदद करते थे । जीवन में जो मिला उससे संतुष्ट रहते थे । अच्छे संस्कारों से युक्त व्यक्तित्व था पांडवों का ।

वो धर्म को मानने वाले थे । तो दुसरी ओर कौरव इसके विपरीत थे । कौरवो और पांडवो में जमीन आसमान का अन्तर था । जैसे एक देवता हो तो दुसरा असुर । 

ये कौरव और पांडव कोई व्यक्ति नहीं है जिसकी मैं बात कर रही हुँ । मैं इनके माध्यम से मनुष्य के गुणों की बात करना चाह रही हुँ । 

कौरवों के बारे में ~ अब बात करते हैं कौरवों की । कौरवों में इतने अवगुण थे की जिसकी व्य्ख्या करना मुश्किल है ।  वो लोभी ,लालची , कपटी और धूर्त थे । जीवन में जो मिला उससे असन्तुष्ट रहते थे और दूसरों की संपति पर हक जमाना चाहते थे । दूसरों का हक मारना ,प्रजा को कष्ट देना उन्हें इसी में आनंद आता था । 

हिंसक और दुराचारी थे कौरव । 

वे जैसे खुद थे सबको वेसा ही बनाना चाहते थे । आसुरी प्रवर्तियों से युक्त कौरवों को पांडव फूटी आंख भी नहीं सुहाते थे । 

क्योकिं देव और असुर का कभी मेल नहीं हो सकता । 

कौरवों का अन्त तो निश्चित ही था । उनकी गति तो स्वयं उन्होनें ही तय की थी ।

कौरव और पांडव दौ विपरीत शक्तियां थी जो महाभारत के दौरान एक दूसरें से टकराई ।

{ महाभारत का अभिन्न अंग द्रौपदी }

द्रौपदी अग्नि से उत्पन्न हुई एक कन्या थी । यहां पर अग्नि उसकी शक्ती का प्रतीक है । उसके भीतर की शक्ती में अग्नि के समान ताकत थी । 

{ द्रौपदी की चारित्रिक विशेषतायें }
 पवित्रता ,गरिमा ,त्याग ,तपस्या ,प्रेम ,समर्पण, बलिदान आदि से द्रौपदी का चरित्र सुशोभित था। 

उसका चरित्र पवित्र था परंतु उसे समाज की सारी अपवित्रतायें प्राप्त हुई । 

वो न्याय की सुगंध फैलाती रही परंतु उसके साथ बार बार अन्याय हुआ । फ़िर भी जैसे एक पुष्प कुचलने के बाद भी खुशबू देता है । ऐसा ही पुष्प के समान उसका चरित्र था । 

द्रौपदी समाज की उन सभी महिलाओं के लिये एक उदहारण हैं जो अन्याय सहती है त्याग करती है ।द्रौपदी ने शोषित और पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलवाया था । 

उसने हर महिला को यहीं संदेश दिया है की कोई भी महिला खुद को अबला नारी ना समझे । मुश्किल  परिस्थियों का ड़टकर मुकाबला करने की ताकत ईश्वर ने सभी को दी है । 
अपनी उसी शक्ती को पहचानकर जीवन में आगे बढ़कर समाज के लिये एक नया उदहारण हर महिला बन सकती है  । 

यही सार है महाभारत की इस कथा मैं द्रौपदी के जीवन का । अन्याय को सहन ना करे उसका विरोध करे । 

अपने जीवन की सीमाएं स्वयं तय करें   

{ श्री कृष्ण }ॐ

श्री कृष्ण स्वयं भगवान के अवतार थे वो 16 कलाओं से पुर्ण थे और वो अर्जुन के मार्गदर्शक भी बने । उन्होनें अर्जुन को गीता ज्ञान दिया । श्री कृष्ण का जन्म धर्म की रक्षा के लिये हुआ था । 
भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं कहा था की जब जब संसार में धर्म की हानि होती है अधर्म बढ़ता है तब तब"  मैं " अवतार लेता हुँ । 
बढ़ते अधर्म को रोकने के लिये श्री कृष्ण का जन्म हुआ था । 

भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को जो ज्ञान दिया वो अद्भूत है । श्री कृष्ण ने अर्जुन को जीव ,आत्मा ,परमात्मा के विषय में ज्ञान देकर अर्जुन के सभी प्रश्नो का हल कर उसके संशय दुर किये थे । 
ये जीवन क्या है ? इसका उद्देश्य क्या है ?
आत्मा क्या है ? आत्मा की उत्पति कैसे हुई ? 

परमात्मा क्या है ? 

कर्म और भाग्य क्या है ? इनमें क्या अन्तर है ? 

संयम क्या है ? 

प्रेम क्या है ? श्री कृष्ण ने मनुष्य जीवन के सभी मूल्यों से अर्जुन को अवगत करवाया फिर उसे परमात्म ज्ञान दिया। और आत्मस्वरुप का दर्शन करवाया । 

अन्ततः जो ईश्वर के साथ चलता है वही विजयी होता है । जय श्री कृष्ण🙏

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